Synchronous motor working principle in hindi आइये जानते है Synchronous motor क्या है। दोस्तो आज इस पोस्ट में हम जानेंगे कि सिंक्रोनस मोटर क्...
Synchronous motor working principle in hindi आइये जानते है Synchronous motor क्या है।
दोस्तो आज इस पोस्ट में हम जानेंगे कि सिंक्रोनस मोटर क्या है कैसे काम करता है इसके फायदे क्या है इसके नुकसान क्या है और इसका उपयोग कहां पर किया जाता है आज इन सारे प्रश्नों का जवाब इस पोस्ट में मिलने वाला है और इसके साथ साथ इस मोटर का उपयोग किन किन जगहों पर किया जाता है या फिर किया जाना अनिवार्य है आजइन सब चीजों के बारे में डिटेल में जानेंगे।
Synchronous motor (सिंक्रोनस मोटर) क्या है
सिंक्रोनस मोटर एसी विद्युत सप्लाई से चलने वाला एक मोटर होता है जो कि इलेक्ट्रिकल एनर्जी मैकेनिकल एनर्जी बदलने का कार्य करता है यह मोटर एसी सप्लाई का सबसे अलग तरह का मोटर होता है और इसको अलग होने का एक मात्र कारण या होता है की इसका जो स्पीड होता है वह औरों से अलग होता है यानी कि यह सिंक्रोनस स्पीड से घूमने वाला मोटर होता है सिंक्रोनस स्पीड वह स्पीड होता है जोकि लोड बढ़ने और घटने पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है यानी कि मान लीजिए मोटर का स्पीड 1500 है तो अगर इसमें लोड पड़ता है तो भी है 1500 स्पीड से ही घूमेगा अगर वहीं पर नॉन सिंक्रोनस मोटर की बात किया जाए तो इसका स्पीड सिंक्रोनस स्पीड से थोड़ा कम हो जाता है और यह मोटर थोड़ा अलग इसलिए और होता है क्योंकि सिंक्रोनस मोटर कभी भी सेल्फ स्टार्ट नहीं होता है इसको स्टार्ट करने के लिए एक्सटर्नल विद्युत सप्लाई की आवश्यक पड़ता है जिसके कारण यह मोटर मैं मेंटेनेंस खर्चा तथा मोटर का कास्ट इत्यादी ज्यादा होता है।
Phase के अनुसार synchronous motor के प्रकार
जैसा कि हम सभी को मिलता है हमारा विद्युत सप्लाई 2 तरह से होता है यानी कि हम विद्युत को दो तरह से यूज करते हैं एक सिंगल फेज में जाने की 240 वोल्टेज और थ्री फेज में यानी कि 440 वोल्टेज तो जब हम विद्युत सप्लाई दो तरह का उपयोग कर रहे हैं तो हमारा कोई भी प्रोडक्ट अगर विद्युत से चलने वाला है तो वह भी दो तरह का ही होगा इसलिए सिंक्रोनस मोटर भी विद्युत सप्लाई के हिसाब से दो तरह से होते हैं एक सिंगल फेज सिंक्रोनस मोटर 3 फेज सिंक्रोनस मोटर।
. सिंगल फेज सिंक्रोनस मोटर
वैसे तो इस मोटर का उपयोग ना के बराबर होता है या फिर कहीं कहीं पर ही उपयोग होता ही होगा तो इसके बारे में हम चर्चा नहीं करेंगे क्योंकि इसको ना मिली कोई पूछता भी नहीं है और यहां मोटर बनता भी बहुत कम है बस इतना जान लीजिए यह मोटर सिंगल फेज से संचालित किया जाता है।
. थ्री फेज सिंक्रोनस मोटर
थ्री फेज सिंक्रोनस मोटर थ्री फेज सप्लाई से संचालित किया जाता है तथा इसके साथ में एक एक्सटर्नल पावर सप्लाई या फिर एक्सटर्नल मोटर वाइंडिंग इत्यादी के सहारे से इसे चालू किया जाता हैं
Construction of synchronous motor in Hindi
जिस तरह से इंडक्शन मोटर में दो मुख्य पार्ट्स होते हैं यानी की स्टेटर और रोटर ठीक इसी प्रकार सिंक्रोनस मोटर में भी दो मुख्य पार्ट्स होते हैं जिन्हें स्टेटर और रोटर के नाम से जानते हैं।
. सिंक्रोनस मोटर का स्टेटर
यह मोटर का स्थिर वाला पार्ट्स होता है अगर देखा जाए तो मोटर का रोटर को छोड़ कर के इसके सारे पार्ट्स स्थीर ही रहते अगर देखा जाए तो स्टेटस बहुत सारे छोटे छोटे पार्ट्स को मिलाकर बनाए जाते हैं यानी कि स्टेटर के साथ में और बहुत सारे पार्टस जुड़े होते हैं जैसे फ्रेम, वाइंडिंग, स्टेटस कोर, इत्यादि लगे रहते हैं स्टेटर सिलिकॉन तथा स्टील की मिश्र धातु से बनाया जाता है ताकि इसके अंदर होने वाले एडी करंट लॉसेस तथा hysteresis यानी कि आयरन लॉसेस को कम किया जा सके अगर बात किया जाए इसके पूरे फ्रेम की तो इसका पूरा फ्रेम कास्ट आयरन का बना होता है फ्रेम मतलब की इसका पूरा ऊपर का बॉडी जो होता है उसे हम फ्रेम के नाम से जानते हैं। और इसके साथ साथ स्टेटर के अंदर ही थ्री फेज वाइंडिंग किया जाता है।
सिंक्रोनस मोटर का रोटर
रोटर हमेशा घूमने वाला भाग होता है जैसा कि हम सभी को पता है और इसके साथ साथ जो भी लोड होता है जो भी मशीनरी इत्यादि मोटर से चलाया जाता है वह रोटर से ही जुड़ा होता है यह बैरिंग के बेसिस पर स्टेटर के अंदर घूमता है तथा रोटर का अगला वाला भाग लोड के साथ कनेक्ट होता है इसे हमेशा दो भागों में बांटा गया है जैसे।
. साइलेंट पोल रोटर
. सिलेंडरकल टाइप रोटर
साइलेंट पोल रोटर
सैलीयंट पोल रोटर के बाहरी सतह पर पोल होते जिसमें बैंडिंग लपेटी जाती है इस रोटर का व्यास ज्यादा होता है और लम्बाई कम होती है. व्यास जादा होने के कारण रोटर पर छे से लेके चालीस तक पोल होते है इस रोटर का व्यास जादा होने के कारण लो स्पीड से घुमाया जाता है अर्थात साइलेंट पोल रोटर आम तौर पर कम गति वाली विद्युत मशीनों में उपयोग किए जाते हैं, जैसे कि 100 आरपीएम से 1500 आरपीएम चूंकि रोटर की गति कम होती है इसलिए आवश्यक आवृत्ति प्राप्त करने के लिए अधिक संख्या में ध्रुवों की आवश्यकता होती है। बात किया जाए बेलनाकार रोटर के अपेक्षा यह इतना अच्छा नहीं है।
ऑपरेशन के दौरान रोटर दोलनों को रोकने के लिए मुख्य पोल रोटर्स को आमतौर पर डैपर वाइंडिंग की आवश्यकता होती है।
सिलेंडरकल टाइप रोटर
यह रोटर Sailent Pole रोटर से बिलकुल अलग तरीके का होता है। इसमें चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करने वाला कोई भी पोल बाहर की तरफ नहीं होतो बल्की यह एक साधारण सा बेलना के आकार जैसा होता है। इसलिए इसे Cylindrical Type Rotor अर्थात बेलनाकार रोटर कहते है। अगर बात किया जाय इसके धातु के बारे में तो यह high निकेल और क्रोमियम मोलिब्डेनम स्टील के मिश्रधातु से बनाया जाता है। इसके सतह के लगभग 66 प्रतिशत भाग पर एक दुसरे के समान्तर में पतली पतली स्लॉट काटी गयी होती है और इन्ही स्लॉट में फील्ड वाइंडिंग को फिट किया जाता है। और अगर बात किया जाय रोटर के और खासीयत के बारे मे तो यह चुंबकीय फ्लक्स बराबर रूप से स्टेटर के Coil से लिंक करती है। और जहां पर हाई स्पीड का आवश्यकता होता है वहां पर इस तरह का रोटर प्रयोग किया जाता है।
Synchronous motor working principle in hindi
सिंक्रोनस मोटर्स का कार्य रोटर के चुंबकीय क्षेत्र के साथ के ऊपर निर्भर करता है निर्भर का मतलब कुल मिला जुला कर जिस तरह से स्टेटर के अंदर मैग्नेटिक मोटि फोर्स उत्पन्न होता है ठीक उसी प्रकार से रोटर के अंदर भी मैग्नेटिक मोटिव फोर्स उत्पन्न करने के लिए एक्सटर्नल सप्लाई की आवश्यकता पड़ती है जब स्टेटर के 3 फेज वाइंडिंग में 3 फेज पावर के साथ जोड़ा जाती है। तो स्टेटर वाइंडिंग मे एक 3 फेजे घूर्णन चुंबकीय-क्षेत्र उत्पन्न करती है। रोटर को डीसी सप्लाई दी जाती है रोटर स्टेटर वाइंडिंग द्वारा निर्मित घूर्णन चुंबकीय-क्षेत्र में प्रवेश करता है और तुल्यकालन में घूमता है। अब, मोटर की गति आपूर्ति की गई धारा की आवृत्ति पर निर्भर करती है सिंक्रोनस मोटर की गति को लागू करंट की आवृत्ति द्वारा नियंत्रित किया जाता है। और स्टेटर में उत्पन्न चुंबकीय फ्लक्स के गति को निम्न फार्मूला द्वारा ज्ञात किया जाता है। जैसे
Synchronous speed =
Ns=120f/P
इस फार्मूला में f AC सप्लाई की आवृति तथा P स्टेटर में पोल की संख्या है
यदि ब्रेकडाउन लोड से अधिक लोड लगाया जाता है, तो मोटर डीसिंक्रोनाइज़ हो जाती है। 3 चरण स्टेटर वाइंडिंग रोटेशन की दिशा निर्धारित करने का लाभ देती है। सिंगल-फेज वाइंडिंग के मामले में, रोटेशन की दिशा प्राप्त करना संभव नहीं है और मोटर किसी भी दिशा में शुरू हो सकती है। इन तुल्यकालिक मोटर्स में रोटेशन की दिशा को नियंत्रित करने के लिए प्रारंभिक व्यवस्था की आवश्यकता होती है।
Synchronous motor का उपयोग कहा पर किया जाता है।
. सिंक्रोनस मोटर का उपयोग अगर देखा जाए तो सबसे ज्यादा वहां पर किया जाता है जहां पर कांस्टेंट स्पीड की आवश्यकता होती है जाने कि जहां पर स्पीड वेरिएशन अलाउड नहीं होता है वहां पर अधिकतम Synchronous motor का उपयोग किया जाता है।
. इसके साथ-साथ सिंक्रोनस मोटर का उपयोग पावर फैक्टर सुधारने के लिए भी किया जाता है जहां पर पावर जनरेशन होता है अधिकतर वहां पर इस मोटर का प्रयोग किया जाता है।
. सिंक्रोनस मोटर का उपयोग प्रेस मिल ,कंप्रेसर आदि में किया जाता है। क्योंकि यहां पर एक कांस्टेंट स्पीड की आवश्यकता पड़ती है।
Advantage of synchronous motor
. इस मोटर का सबसे बड़ा फायदा सिर्फ यही होता है कि यह मोटर एक कांस्टेंट स्पीड वाला मोटर होता है यानी कि इस मोटर की स्पीड इस के रेटिंग के हिसाब से लोड दिया जाए तो यह मोटर का स्पीड फिक्स रहेगा।
Disadvantage of synchronous motor
यह मोटर नान सिंक्रोनस मोटर से बहुत ज्यादा महंगा मिलता है इसके साथ साथ इस मोटर का मेंटेनेंस खर्चा तथा स्टार्टिंग के लिए एक्सटर्नल सप्लाई की आवश्यकता पड़ती है जिसके कारण इसका देखरेख करना यानी कि pm करना काफी कठिन होता है
तो दोस्तों मैं आशा करता हूं कि यह पोस्ट आपके लिए काफी मददगार साबित हुआ होगा अगर आप इस पोस्ट के लिए किसी भी प्रकार का सलाह या फिर सुझाव देना चाहते हैं तो आप हमें कमेंट करके बता सकते हैं इस पोस्ट को पढ़ने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।
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