VFD working application and benefits in Hindi | VFD क्या है और कैसे काम करता है। आज इस पोस्ट में बात किया जाएगा कि VFD क्या है कैसे काम करता...
VFD working application and benefits in Hindi | VFD क्या है और कैसे काम करता है।
आज इस पोस्ट में बात किया जाएगा कि VFD क्या है कैसे काम करता है इसका application और इसके क्या क्या फायदे हैं इसके साथ साथ यह भी जानेंगे कि का VFD का पूरा नाम क्या है और आज के समय में VFD इतना ज्यादा जरूरी क्यों है।
VFD क्या है।
पोस्ट में आगे बढ़े उससे पहले यह जान लेते हैं कि इसका पूरा नाम क्या है यानी कि VFD full form - variable frequency drive होता है।
जिस तरह मोटर को स्टार्ट करने के लिए एक स्टार्टर का प्रयोग करके चलाया जाता है ठीक उसी प्रकार से मोटर को चलाने के लिए भी VFD यानी कि variable frequency drive का उपयोग किया जाता है इसे एक तरह से मोटर का स्टार्टर के नाम से भी बुला सकते है। हम लोगो को कालेजो इत्यादी मे यही पढ़ाया जाता है कि मोटर का स्पिड को control voltage या फिर motor के number of pole को कम या जादा करके motor के speed को कम या फिर जादा कर सकते है लेकीन जैसे जैसे technology बढ़ता गया वैसे वैसे नई नई चीजों का इजात होते गया तकरीबन 1970 और 1980 के बीच में variable frequency drive का भी खोज किया गया था लेकिन हमारे इंजीनियरिंग लाइन के शिक्षा का दुर्भाग्य ही सोचिए जो कि इन सब चीजों के बारे में अच्छे से नहीं बताया जाता है औद्योगिक क्षेत्रों में काम आने वाला सबसे महत्वपूर्ण VFD का उपयोग इंडक्शन मोटर के स्पीड को कम और ज्यादा करने के लिए लगाया जाता है एक तरह से देखा जाए तो यह इकोनामिक की दृष्टि से बहुत ही सस्ता और ज्यादा उपयोगी होता है ऐसा इसलिए अगर हमें किसी मोटर बिना vfd के अगर मोटर को चलाते हैं तो मोटर के स्पीड को कम ज्यादा करने के लिए वोल्टेज को कम ज्यादा करना पड़ेगा या फिर मोटर के अलग-अलग number of pole के हिसाब से एक काम करने के लिए बहोत सारे मोटरों को लगाना पड़ेगा जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में सबसे ज्यादा उपयोग होने वाला है क्रेन इत्यादी होते हैं जैसे कि क्रेन इत्यादी की स्पीड को हमेशा आवश्यकता अनुसार कम ज्यादा करना पड़ता है अगर इसे हम बिना Vfd के चला पाना असंभव कार्य जैसा होगा लेकिन बहोत सारे लोगों के मन में एक प्रश्न आ रहा होगा की रिवर्स फॉरवर्ड स्टार्टर का प्रयोग variable frequency drive के जगह पर लगा कर चला सकते है की नही लेकिन दोस्तों रिवर्स फॉरवर्ड स्टार्टर का प्रयोग करके क्रेन इत्यादी चला तो सकते हैं लेकिन उसके स्पीड को कम या ज्यादा नहीं कर सकते।
VFD ( Variable frequency drive) working in hindi
जैसा कि हम लोगो ने जाना कि VFD से induction motor कि स्पिड को कम जादा कर सकते है
अब जानते हैं की आखिर काम कैसे करता है देखिए जब VFD को AC supply दिया जाता है तो इसके अन्दर लगे हुए कंपोनेंट के द्वारा AC से DC में परिवर्तित हो जाएगा उसके बाद फिर सप्लाई DC से AC में परिवर्तित हो जाएगा और VFD का आउटपुट जो होगा यानी कि voltage and frequency change होकर निकले गा अगर देखा जाए तो इसके द्वारा voltage और frequency को कम किया जाता है इसलिए इसे एक और नाम से बुलाया जाता है vvfd (variable voltage frequency drive) जैसे मान लिजिए कोई 3 phase induction motor है जिसका voltage, frequency, और motor number of pole दिया गया
V= 415
F= 50Hz
Pole= 4
और मोटर की स्पिड निकालने का फार्मूला कुछ इस तरह से होता है
N = 120f/p
अब उपर दिए गए voltage, frequency, and pole को यदी formula के द्वारा निकालते है तो स्पीड क्या होगा
N = 120×50/4
N = 1500
लेकिन अगर इसी जगह पर frequency का जो मान है 50 Hz है अगर उसी जगह पर फ्रीक्वेंसी का मान 40Hz है तो तब देखते हैं की मोटर का स्पीड कितना होता है जैसे
N = 120×40/4
= 1200 rpm होगा
Note = एक बात हमेशा याद रखना इंडक्शन मोटर के अंदर जो भी rpm निकलता है ऊपर दिए गए फार्मूले के अनुसार उस RPM में इंडक्शन मोटर के स्लिप के मान को जोड़ करके निकाला जाता है अगर आपका इंडक्शन मोटर का RPM 1500 निकल रहा है फार्मूले के हिसाब से तो उसमें स्लिप के मान को अगर जोड़ेंगे तो 1500 RPM से कम हो जाएगा यह डिपेंड करता है कि आपकी इंडक्शन मोटर में स्लिप का मान कितना है।
जैसा कि आपने उदाहरण के द्वारा देखा होगा की फ्रीक्वेंसी कम करने पर RPM अपने आप कम हो जा रहा है ठीक इसी प्रकार से जितना परसेंट RPM कम होगा उतना परसेंटेज हमारा वोल्टेज कम होगा लेकिन यह जो frequency होता है यह जब VFD डीसी सप्लाई से एसी सप्लाई में बदलता है तो जो आउटपुट होगा वह frequency कम होकर निकलेगा लेकिन जो वोल्टेज होता है जैसे ही इनपुट सप्लाई दिया जाता है उसी समय वोल्टेज कम हो जाता है अब जैसा आपको पता चल गया होगा आखिर क्यों VFD का उपयोग करना इतना जरुरी है।
VFD drive के अंदर क्या-क्या होता है
इसके अंदर जब हम विद्युत सप्लाई देते हैं तो वह scr यानी कि रेक्टिफायर से होकर गुजरता है रेक्टिफायर का काम alternating current को direct current में बदलने का कार्य करता है रेक्टिफायर से होकर जब विद्युत सप्लाई डीसी सप्लाई में बदल जाती है तो उसको एक फिल्टर से होकर गुजारा जाता है ऐसा इसलिए क्योंकि जो डीसी सप्लाई होता है वह पूर्ण रूप से डीसी सप्लाई नहीं होता है यानी कि शुद्ध नहीं होता है और जो फिल्टर के रूप में लगाया जाता है फिल्टर के अंदर उपयोग होने वाले मटेरियल को कैपेसीटर और इंडक्टर के नाम से जाना जाता है कैपेसिटर सेक्शन से निकलने के बाद विद्युत सप्लाई इनवर्टर के अंदर जाता है जोकि वह पूर्ण रुप से डीसी को एसी में बदल देता है लेकिन जो आउटपुट निकलेगा वह इनपुट सप्लाई से अलग रहेगा यानि कम फ्रीक्वेंसी कम वोल्टेज रहेगा इनवर्टर के अंदर प्रयोग होने वाले switch की बात किया जाए तो उसे igbt के नाम से जाना जाता है।
IGBT क्या होता है
IGBT के बारे में बात करे उससे पहले इसका पुरा नाम जान लेते है IGBT full form = insulated gate bipolar transistor
इसको बनाने के लिए दो प्रकार के ट्रांजिस्टर को मिलाकर बनाया जाता है MOSFET transistor and bjt transistor इन दोनों ट्रांजिस्टर के अंदर उपलब्ध गुणों को मिलाकर IGBT transistor को बनाया जाता है यह variable frequency drive के अंदर एक switch के रूप में किया जाता है।
अब जानते हैं आखिर VFD लगाते समय और इसके साथ में किन-किन चीजों का आवश्यकता पड़ता है जैसे इनपुट सप्लाई में mpcb, inductor, contactor, PLC, इत्यादि का प्रयोग किया जाता है।तो साथियों मैं आशा करता हूं variable frequency drive के इस छोटे से पोस्ट में आप सभी को बहुत सारे प्रश्नों का उत्तर मिल गया अगर आप किसी भी प्रकार का प्रश्न पूछना चाहते हैं इलेक्ट्रिकल से संबंधित या फिर इलेक्ट्रॉनिक से संबंधित तो आप हमें कमेंट करके पूछ सकते हैं इसी के साथ साथ अगर आप किसी भी प्रकार का सलाह या फिर सुझाव देना चाहते हैं तो आप हमें कमेंट करके बता सकते हैं इस पोस्ट को पढ़ने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।


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