What is Insulator ( Insulator क्या है) || Insulator types in hindi इस पोस्ट में जानेंगे कि What is Insulator ( Insulator क्या है) तथा इसके स...
What is Insulator ( Insulator क्या है) || Insulator types in hindi
इस पोस्ट में जानेंगे कि What is Insulator ( Insulator क्या है) तथा इसके साथ साथ यह भी जानेंगे हम लोग की Insulator types यानि कि Insulator कितने प्रकार के होते हैं। यह भी जानेंगे कि इंसुलेटर का उपयोग कहां पर किया जाता है तथा कौन सा इंसुलेटर किस जगह पर प्रयोग किया जाता है यह भी जानेंगे।
What is Insulator ( Insulator क्या है)
Insulator एक प्रकार का रजिस्टेंस की तरह होता है जिसका काम इलेक्ट्रिकल फील्ड में किया जाता है जिसका काम होता है विद्युत सप्लाई के और ह्यूमन टच के बीच में एक गैप पैदा करना अर्थात आपने गांव शहर या फिर बाजार के टावर यानी कि लाइन के खंभों में देखा होगा जिसमें तार को बांधा जाता है अर्थात जो बीच में खंभे और तार के बीच में लगाया जाता है उसे इंसुलेटर कहते हैं यह एक प्रकार से विद्युत सप्लाई को एक जगह से दूसरी जगह जाने में बाधा उत्पन्न करता है यानी कि इंसुलेटर जहां पर लगाया जाता है उसके आगे से जुड़े चीजों में विद्युत सप्लाई नहीं जा पाता है यह एक सेफ्टी के दृष्टि से लगाया जाता है जिसका प्रयोग के बिना हम विद्युत सप्लाई को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना थोड़ा असंभव जैसा लगता यह अलग-अलग वोल्टेज के हिसाब से अलग-अलग तरह के डिजाइन के आते हैं जिनका वर्णन इसी पोस्ट में आगे हम आपको बताएंगे जब हम आपको बताएंगे Insulator types के बारे में।
एक अच्छे Insulator में क्या क्या क्वालिटी होना चाहिए
जब कभी भी हमें इंसुलेटर प्रयोग करना हो चाहे वह किसी खंभे या फिर ओवर हेड लाइन या फिर किसी टावर इत्यादि से जहां से भी हमें कहीं से भी विद्युत सप्लाई का आवागमन करना है वहां पर अगर इंसुलेटर का प्रयोग कर रहे हैं तो हमें सबसे पहले निम्न बातों का ध्यान देना आवश्यक है।
. एक इंसुलेटर अच्छा तभी माना जाता है जब insulator का मैकेनिकल स्ट्रैंथ (mechanical strength) उच्च होता है।
. इसके साथ साथ अगर देखा जाए तो एक अच्छा इंसुलेटर पर वातावरण का प्रभाव नहीं पढ़ना चाहिए। क्योंकि इसका प्रयोग ही हमेशा बाहर साइड में किया जाता है जहां पर गर्मी बरसात ठंडी हर तरह के मौसमों को सहन करना पड़ता है।
. एक इंसुलेटर को वजन में हल्का होना चाहिए। ताकी केबलो जॉइंट में आसानी हो
. हमेशा ऐसा इंसुलेटर के मटेरियल प्रयोग करना चाहिए जो आसानी से उपलब्ध होना चाहिए। इसके साथ साथ हमेशा ध्यान यह रखें कि इंसुलेटर का मूल्य (low cost) कम होना चाहिए।
Insulator types in Hindi ( जानिए इंसुलेटर के प्रकार हिंदी में )
वैसे तो Insulator दो प्रकार के होते है एक होता है वोल्टेज के अनुसार और एक होता है मटेरियल के अनुसार अर्थात कभी भी अगर कोई आप से पूछ ले इंसुलेटर कितने प्रकार के होते हैं तो आप बताइएगा इंसुलेटर दो प्रकार के हिसाब से वर्गीकृत किए गए हैं पहला वोल्टेज के अनुसार दूसरा मटेरियल के अनुसार और जो वोल्टेज के अनुसार इंसुलेटर होते हैं वह निम्न प्रकार के होते हैं जैसे
. डिस्क इन्सुलेटर- (disk insulator)
. पिन इन्सुलेटर -(pin insulator)
. शैकल इन्सुलेटर -(shackle insulator)
. स्ट्रेन इंसुलेटर- (strain insulator)
. स्टे इन्सुलेटर -(stay insulator)
. रील इन्सुलेटर -(reel insulator
.सस्पेंशन इन्सुलेटर- (suspension insulator)
disk type insulator ( डिस्क इन्सुलेटर )
जिस तरह से इसका नाम disk है ठीक इसी प्रकार से यह एक डिस्क के आकार का इंसुलेटर होता है। सामान्यता यह Porcelain का बनाया जाता है। एक 11 kV केवी तथा 15 केवी के डिस्क बनाए जाते हैं। अगर glass मटेरियल का डिस्क है तो वह एक 11kv तथा 18 केवी का भी डिस्क आता है। और इसमें फायदा या होता है कि जितना ज्यादा डिसाइड करेंगे आप उतना ज्यादा वोल्टेज इसी से गुजारा जा सकता है।
Pin type insulator details in hindi
Pin type insulator भी एक प्रकार का इंसुलेटर होता है जिसका उपयोग 11 हज़ार वोल्टेज से 33 हज़ार वोल्टेज वाले ट्रांसमिशन लाइन में में किया जाता है। इसे सपोर्टिंग पोल या टावर के क्रॉस आर्म पर लगाया जाता है। इंसुलेटर के उपरी भाग में केबल या वायर को सपोर्ट करने के लिए खांचे बने हुए होते है। इन्ही खांचो में विधुत धारा को वहन करने वाले चालक को रखकर ,उसी धातु के बने हुए दुसरे पतले वायर से क्रॉस एंगल बनाते हुए बांध दिया जाता है Pin type insulator मे सबसे बङा फायदा यह है जब कभी भी आंधी या तूफान आते है तो चालक पर इंसुलेटर के कारण अलग नही होता है।
shackle type insulator details in hindi
अधिकतर shackle type insulator मे देखा गया है पोर्सिलेन का उपयोग होते हुये। और इसके साथ साथ यह भी देखा गया है कि फाइबर ग्लास और सिरामिक से भी बनाया जाता है। shackle इंसुलेटर हमेशा horizantal और वर्टिकल दोनों प्रकार से लगा सकते है। इस प्रकार के इंसुलेटर हमेशा Low voltage में उपयोग किया जाता है।
और देखा जाय तो Shackle इंसुलेटर में D ‘ टाइप का क्लैंप होता है। इस क्लैंप के बीचमे इंसुलेटर होता है। D’ Clamp को खम्भे के साथ नट बोल्ट से टाइट किया जाता है।
strain type insulator details in hindi
strain type insulator का प्रयोग हमेशा High वोल्टेज Overhead transmission लाइन में किया जाता है। और हमेशा इनका प्रयोग Starting Point Terminating Point एवं End Point पर Use किया जाता है। इसके साथ साथ जहाँ पर अधिक तनाव बल ( tenstion strength ) की जरुरत होती है वहाँ पर इन्हें parallel जोड़कर Use किया जाता है।
stay type insulator details in hindi
अक्सर जब हम गांव शहरो के गलीयो में बिजली के खम्भो को देखते है तो खम्भे के उपर तथा एक तार जमीन में कनेक्ट होता है। यह दोनो साइड तार जो आपस में जुड़े रहते है वह स्टे इंसुलेटर के उपयोग से तार जुड़ा होता है। इसक साथ ओवर हेड लाइन में वायर को टर्न करना पड़े या फिर मोड़ना पड़े तो ऐसी जगह पर भी स्टे टाइप का इंसुलेटर लगाया जाता है। अगर बात किया जाए इसकी संरचना के बारे में तो इसमें दो होल होते है। जिसमे दो गृप रहती है। इसे अलग – अलग तरह से कनेक्ट किया जाता है। पर सभी का काम लाइव वायर को दूर रखना है।
Stay Insulator पोर्सिलिन से बनाया जाता है।
स्टे इंसुलेटर की एक खासियत है, की वायर यदि टूट जाये, जमीं पर गिर जाये तो भी लाइव वायर ग्राउंड को टच नहीं करता।
reel type insulator details in hindi
इसका प्रयोग हमेशा तब किया जाता है जब हम किसी वायार को दुसरे वायर से कनेक्ट करते है तो दोनो वायर को ground fault से बचाने के लिए किया जाता है।
suspension types insulator details in hindi
suspension types insulator का उपयोग 33 KV से ज्यादा वोल्टेज पर कार्य करने वाले ट्रांसमिशन लाइन में प्रयोग किया जाता है यह conductor को पोल या विधुत टावर से अलग (Insulate)करने के लिए किया जाता है। अगर इसके मटेरियल कि बात किया जाय तो यह पोर्सलिन से बनाया जाता है जिसमे एक या एक से अधिक डिस्क के आकार वाले कुचालक को धातु से एक दुसरे के साथ जोडकर तैयार किया जाता है।
अब बात करते है मटेरियल के अनुसार इंसुलेटर के बारे में यह भी निम्न प्रकार के होते हैं जैसे
porcelin type Insulator details in hindi
इस प्रकार का इंसुलेटर आप को अधिकतम देखने के लिए मिलेंगे क्योंकि यह इंसुलेटर हाई वोल्टेज तथा लो वोल्टेज दोनों के लिए प्रयोग किया जाता है इसको पोरसलीन टाइप इंसुलेटर इसलिए बुलाते हैं क्योंकि यह पोर्सलिन से मिलाकर बनाया जाता है अगर बाता किया जाय इस पदार्थ की डाइलेक्ट्रिक स्ट्रैंथ कि तो इसका डाइलेक्ट्रिक स्ट्रैंथ 60 kv/cm होता है। और इस पदार्थ का कलर हमेशा वाइट होता है लेकिन इंसुलेटर बनाने के बाद इस पर एक ग्लेजिंग किया जाता है ग्लेजिंग करने से हमारे इंसुलेटर का सरफेस स्मूथ हो जाता है जिसके चलते वातावरण का प्रभाव इस पर कम हो जाता है।
Glass type insulator detail in Hindi
Glass type insulator का प्रयोग भी हमेशा हाई वोल्टेज तथा लो वोल्टेज के लिए किया जाता है यह भी porcelin type Insulator के जैसा ही होता है लेकिन इसमें बस अंतर इतना होता है ग्लास टाइप इंसुलेटर में इसका जो डाइलेक्ट्रिक स्ट्रैंथ होता है वह पोर्सलिन टाइप इंसुलेटर से कहीं ज्यादा होता है इसलिए इसका प्रयोग आप अपने अधिकतर दिखाओ रेलवे ट्रांसमिशन लाइन में किया जाता है जोकि ग्लास के चमकता रहता है यह ट्रांसपेरेंट कलर धारण करता है अगर इसकी डाइलेक्ट्रिक स्ट्रैंथ के बारे में बात किया जाए तो इसका डाइलेक्ट्रिक स्ट्रैंथ 140kv/cm होता है।
Geopol polymer type insulator details in hindi
Geopol polymer type insulator हमेशा फाइबर ग्लास और एपॉक्सी पॉलिमर (epoxy polymer) का बनाया जाता है Polymer or geopole material insulator की खास बात या होता है कि अगर इसकी तुलना और पोर्सलीन टाइप इंसुलेटर से किया जाए तो उससे यह 70 परसेंट हल्का होता है
इसके कलर की बात किया जाए तो या हमेशा ग्रे कलर में पाया जाता है और इसका उपयोग शहरों के उन प्रदूषित एरिया में किया जाता है जहां पर बहुत ज्यादा गंदगी होता है।
दोस्तों मैं आशा करता हूं कि आप पोस्ट आपके लिए बहुत ही ज्यादा मददगार साबित हुआ होगा आपको इंसुलेटर से संबंधित बहुत सारे प्रश्नों पर जवाब मिल गए होंगे इस पोस्ट में अगर आपको इस पोस्ट से संबंधित किसी भी प्रकार का सलाह या फिर सुझाव देने की इच्छा रखते हैं तो आप हमें कमेंट करके जरूर बताइए इस पोस्ट को पढ़ने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।



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