Battery and cell में difference , battery types and battery working in Hindi, आज इस पोस्ट में बात किया जाएगा battery के बारे में Introductio...
आज इस पोस्ट में बात किया जाएगा battery के बारे में
Introduction of battery
. Battery क्या है
. Battery types
. Battery working
. Battery and cell में difference
. Battery all parts detail
. Battery का आविष्कार किसने किया था और कब किया था
Battery क्या है
Battery केमिकल एनर्जी को इलेक्ट्रिकल एनर्जी में बदलने का कार्य करता है battery जब एक से अधिक cell को आपस में जोड़ दिया जाए तो उसे battery कहते हैं। एक बैटरी को बनाने के लिए बहुत सारे कंपोनेंट्स जरूरत पड़ता है जैसे anode, cathode, electrolyte, separator, container, cell cover, इत्यादि battery एक chargeable and non chargeable उपयंत्र होता है। या उपयोगिता के अनुसार अलग-अलग प्रकार के होते हैं ।
Battery types
Battery मुख्यतः देखा जाए तो सिर्फ दो प्रकार का होता है पहला प्राथमिक तथा दूसरा द्वितीयक ।
प्राथमिक battery
प्राथमिक battery एक प्रकार का ऐसा बैटरी होता है जिसे एक बार उपयोग करने के बाद दुबारा उपयोग नही कर सकते है। यानी कि यह chargeable नहीं होता है प्राथमिक बैटरी में वोल्टाइक पाइल के मूल विचारों का आज भी उपयोग किया जाता है यानी कि इलेक्ट्रोड सामग्री और इलेक्ट्रोलाइट के अपघटन द्वारा उत्पादित विद्युत रासायनिक ऊर्जा जब विद्युत ऊर्जा में परिवर्तन होकर ऊर्जा नष्ट होने के बाद और इलेक्ट्रोड या इलेक्ट्रोलाइट के खराब हो जाने पर टूट जाति है। इसका उपयोग अधिकतर उन जगहों पर किया जाता है जहां पर बहुत कम विद्युत ऊर्जा की आवश्यकता पड़ता है जैसे remote, vehicle, light इत्यादी।
द्वितीयक battery
द्वितीयक battery एक प्रकार का ऐसा battery होता है जिसे उपयोग करने के बाद दोबारा से विद्युत ऊर्जा के द्वारा चार्ज करने के बाद रासायनिक ऊर्जा को फिर से विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करके उपयोग करते है। द्वितीयक battery के उदाहरण कुछ इस प्रकार से जैसे आप अपने हाथ में इस समय इस पोस्ट को पढ़ने के लिए मोबाइल या लैपटॉप लिए होंगे उसमें लगने वाला बैटरी भी द्वितीयक बैटरी के अंतर्गत आता है इसके साथ साथ घरों में यूज होने वाले इनवर्टर में जो बैटरी प्रयोग किया जाता है और UPS इत्यादि में प्रयोग होने वाली battery द्वितीयक बैटरी के अंतर्गत आते हैं इसके बहुत से प्रकार होते हैं जैसे lead acid battery, lithium ion battery, nickel cadmium battery, nickel metal hydride battery,
Lead acid battery
इस Battery को 1859 में बनाया गया था और यह बैट्री दुनिया का पहला chargeable battery है लेड एसिड बैटरी में मुख्यतः तीन चीजों का आवश्यकता होता है जैसे वाटर, लेड, और सल्फर, और बैटरी के + साइड में हमेशा लेड पराक्साइड लिया जाता है और नेगेटिव साइड में केवल लेड लिया जाता है और जो इसके अंदर लिक्विड होता है वह पानी और सल्फर का घोल होता है जिसे H2SO4 भी कहते है जब बैटरी को लोड के साथ कनेक्ट करेंगे तो बैटरी लोड में + और - टर्मिनल से सल्फर लोड की तरफ जाने लगेगा जब बैटरी पूरी तरह से डिस्चार्ज हो जाएगा पाजटिव तथा नेगेटिव टर्मिनल दोनो lead sulfate हो जाता है। कुल मिला जुला कर जब बैटरी चार्ज होता है तो सल्फर पानी में आता है अब जैसे बैटरी डिस्चार्ज होने लगता है सल्फर जो है +- टर्मिनल की तरफ भागने लगता है और डिस्चार्ज होने के बाद दोनों टर्मिनल लेड सल्फेट हो जाते हैं।
Lithium ion battery
इस बैटरी का उपयोग सबसे ज्यादा किया जाता है आप जो मोबाइल फोन उपयोग करते हैं या फिर जो लैपटॉप यूज करते हैं उन सब में lithium ion battery ही पाया जाता है लिथियम बैटरी में मुक्ता 4 main parts होते हैं जैसे एनोड, कैथोड, इलेक्ट्रोलाइट्स, सेपरेटर, सेपरेटर का कार्य होता है कि एनोड और कैथोड आपस में शॉर्ट ना हो जाए सेपरेटर गलती से टूट गया तो बैटरी ब्लास्ट हो सकता है Anode जो होता है वह ग्रेफाइट का बना होता है तथा cathode जो होता है लिथियम मेटल ऑक्साइड का बना होता है और यह दोनों का प्योर होना बहुत ही ज्यादा जरूरी होता है अब मान लेते हैं हम किसी डिवाइस को लोड के साथ में कनेक्ट कर देते हैं अब क्या होगा जो हमारा करंट होगा वह कैथोड टर्मिनल से निकलकर एनोड की तरफ प्रवाहित होगा और जो इलेक्ट्रोन होगा वह एनोड टर्मिनल से निकलकर कैथोड की तरफ प्रवाहित होने लगेगा लोड से होते हुए।
Nickel cadmium battery
Nickel cadmium battery में निकल और कैडियम का उपयोग करके बनाया जाता है जिसमें निकल + टर्मिनल तथा कैडियम - टर्मिनल की तरह कार्य करता है यह साइज में बहुत छोटा होता है इसलिए इसको आसानी से हम अपने पॉकेट में भी ले करके कहीं पर आ जा सकते हैं अगर देखा जाए निकल कैडियम और सेपरेटर को मिलाकर के nickel cadmium battery को बनाया जाता है।
Nickel metal hydride battery
Nickel metal hydride battery का बैटरी डेंसिटी अगर ni-cb से तुलना किया जाए तो इसका ज्यादा होता है जैसे Ni-cb 600mh का बैटरी है तो nickel metal hydride battery का 1600mh battery होगा। इसका + terminal nickel cadmium battery के समान हि होता है लेकिन इसका - terminal cadmium के बजाय हाइड्रोजन को सोखने वाला सिरा प्रयोग किया जाता है।
Battery and cell में difference
Cell एक सिंगल यूनिट होता है जो केमिकल एनर्जी को इलेक्ट्रिकल एनर्जी में बदलने का कार्य करता है जबकि बैटरी बहुत सारे सेल का समूह होता है जो केमिकल एनर्जी को इलेक्ट्रिकल एनर्जी में बदलता है हर सेल में बैटरी नहीं मिलता है लेकिन हर बैटरी को बनाने के लिए सेल की जरूरत पड़ता है।
सेल बहुत सस्ता होता है तुलना करें अगर बैटरी से जबकि बैटरी महंगा होता है सेल से।
सेल को कभी चार्ज नहीं कर सकते हैं लेकिन बैटरी को चार्ज करके फिर उपयोग कर सकते हैं।
Battery का आविष्कार
सन 1799 मे इटालियन वैज्ञानिक अलेसांद्रो वोल्टा ने battery का अविष्कार किया था। जिसे इन्होंने वोल्टिक पाइल का नाम दिया था। वोल्टिक पाइल में तांबे और जिंक के जोड़े का इस्तेमाल किया गया था।
Question. Battery का ah क्या होता है।
Answer. Battery ah full form amper hours होता है। यानी कि ah यह पता चलता है की बैटरी के ऊपर कितने घंटे तक और कितने एंपियर तक लोड दे सकते हैं जैसे मान लीजिए 100ah की battery है और अगर उसमें 10A का लोड देंगे तो ah निकालने के लिए 100/10 divide कर देंगे जैसे 10 घण्टे battery चलेगा।
Question. Hydrometer क्या करता है
Answer. Hydrometer से battery चार्ज है या नहीं है उससे पता करते हैं।
इलेक्ट्रिकल पिक्चर के इस पोस्ट को पढ़ने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद मैंने इस छोटे से पोस्ट में बैटरी के टॉपिक को समझाने की कोशिश किया अगर इस पोस्ट में आपको कुछ करेक्शन की जरूरत है या फिर कोई सलाह या फिर सुझाव देना चाहते हैं तो आप हमें कमेंट करके बता सकते हैं।


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